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राजधानी में IDII प्रेस कॉन्फ्रेंस : महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ल ने कई उद्यमिता की परियोजनाओं पर की चर्चा, 8000 से अधिक आजीविका उद्यमियों को मिला बढ़ावा

रायपुर। भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) अहमदाबाद ने राजधानी के एक स्थानीय होटल में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई. इस प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ सुनील शुक्ल ने छत्तीसगढ़ के लिए विभिन्न उद्यमिता की परियोजनाओं पर चर्चा की.

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उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) अहमदाबाद भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय से उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस) के रूप में मान्यता प्राप्त है. यह संस्थान शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण, राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने के क्षेत्र में एक नेशनल रिसोर्स आर्गेनाइजेशन है.

ईडीआईआई पिछले 4 वर्षों से स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (एसवीईपी) के लिए छत्तीसगढ़ में एसआरएलएम के साथ काम कर रहा है, जो की बिहान के रूप में जाना जाता है. ईडीआईआई द्वारा छत्तीसगढ़ के चार आवंटित ब्लॉकों में 8000 से अधिक आजीविका उद्यमों को बढ़ावा दिया है, जिनमें आदिवासी और महिला उदमियों की बहुलता है.

ईडीआईआई ने हाल ही में रायपुर में एक कार्यालय खोला है, ताकि उद्यमिता शिक्षा, अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, सरकार और उद्योग के बीच परस्पर निर्भरता और सहयोग का माहौल तैयार किया जा सके. छत्तीसगढ़ और उसके आस-पास के क्षेत्रों में एमएसएमई क्षेत्र को सहायता प्रदान की जा सके, जिसका मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से महिलाओं, विकलांगों, छात्रों, कारीगरों, कृषकों और ट्रांसजेंडरों का उत्थान है.

छत्तीसगढ़ में प्रमुख संस्थानों जैसे डॉ एस पी मुखर्जी आईआईआईटी नया रायपुर, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर और सरकार के साथ कई अन्य समझौता (एम्ओयू) हेतु पाइपलाइन में हैं. राज्य के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से, ईडीआईआई का इरादा फिनटेक, एडुटेक, क्लेनटेक, हेल्थटेक, बायोटेक, आदि जैसे प्रौद्योगिकी में छात्र उद्यमिता के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना है.

ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ सुनील शुक्ल ने कहा, छत्तीसगढ़ एक संसाधन संपन्न राज्य है और जिसमें लॉजिस्टिक्स, रत्न एवं आभूषण, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, दवा, आवश्यक तेल, जैव ईंधन, कृषि आदि के क्षेत्र में अपार संभावनाएं है. ईडीआईआई, लगभग चार दशकों के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव के साथ, आदिवासी और ग्रामीण आबादी के जीवन में बदलाव लाने के लिए कार्यरत है.

छत्तीसगढ़ के समृद्ध वनस्पतियों और जीवों, पारंपरिक कला, शिल्प, कपड़ा और संस्कृति, विशेष रूप से दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ईडीआईआई, क्लस्टर विकास में कई वर्षों के अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता के साथ काम कर रहा है. इस उद्देश्य से राज्य सरकार, उद्योग और अन्य सहायता संस्थानों के साथ और अधिक सक्रियता से काम करने हेतु तत्पर है.

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