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: छत्तीसगढ़ के सरपंच की दिल्ली में चर्चा: नितिन गडकरी के आवास तक लुढ़कते हुए पहुंचे, गांव में 2KM पक्की सड़क की मांग

MP CG Times / Mon, Jul 22, 2024

Chhattisgarh Mahasamund Bamburdih Sarpanch Shatrughan Chelak protest in Delhi: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में ग्राम पंचायत बम्बुरडीह के सरपंच ने सड़क की मांग को लेकर अनोखा प्रदर्शन किया. ग्रामीणों ने 5 हजार रुपए एकत्र कर सरपंच शत्रुघ्न चेलक को दिल्ली भेजा. जहां सरपंच सड़क पर लेटकर और लोटकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के आवास पहुंचे. हालांकि, वे उनसे नहीं मिल पाए. सरपंच शत्रुघ्न चेलक का कहना है कि रामदाबरी से बावनकेरा गांव तक 2 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क है. सड़क नहीं होने के कारण लड़के-लड़कियों की शादी नहीं हो पा रही है और न ही इस गांव में कोई शादी करने को तैयार है. ग्रामीण लगातार मंत्री और अधिकारियों से मांग कर थक चुके हैं. बारिश के दौरान सड़क पर भर जाता है कीचड़ बारिश के दौरान रामदाबरी गांव की सड़क पर भर जाता है कीचड़. जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मरीजों को इमरजेंसी में खाट पर अस्पताल ले जाना पड़ता है. बच्चे और शिक्षक स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं. इस सड़क पर लगातार दुर्घटनाएं भी हो रही हैं. ग्राम रामदाबरी में करीब 800 की आबादी बताया जा रहा है कि पक्की सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2023 में 2 करोड़ 53 लाख 71 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद अभी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। जिसके कारण सड़क निर्माण नहीं हो पाया है। ग्राम पंचायत बम्बुरडीह के आश्रित ग्राम रामदाबरी की आबादी करीब 800 है। राजस्व रिकॉर्ड में नहीं है गांव सरपंच चेलक 17 जुलाई को अपनी पत्नी के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। वहां जब उनकी किसी केंद्रीय मंत्री से मुलाकात नहीं हो पाई तो उन्होंने 21 जुलाई को विरोध जताया। उनका कहना है कि आश्रित ग्राम रामदाबरी का नाम राजस्व रिकॉर्ड में नहीं है। भारत सरकार के नक्शे में नहीं है। गूगल में भी नहीं है। नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ चूंकि हमारे गांव का नाम राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में नहीं है, इसलिए हमें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए गांव का नाम राजस्व विभाग में जोड़ा जाए। सड़क बननी चाहिए। उनका कहना है कि मैं न्यूज़ में केंद्रीय मंत्री को सड़क बनाते हुए देखता था, इसलिए मैं भी इसी उम्मीद से यहाँ आया हूँ। जब तक उनसे नहीं मिलूँगा, यहीं रहूँगा। Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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