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सुखचंद के कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनने की सीक्रेट स्टोरी: MP के प्रथम CM के पोते और MLA के करीबी को पछाड़ा, पढ़िए जमीन टू डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट की कुर्सी की कहानी ?

Secret Story of Sukhchand Besra Gariyaband Congress District President: गिरीश जगत की रिपोर्ट। गरियाबंद की राजनीति में वह दिन बहुत सामान्य था, लेकिन कांग्रेस संगठन के भीतर एक खामोशी गाढ़ी होती जा रही थी। जिला अध्यक्ष के नाम पर चर्चाएं तेज़ थीं—तीन दावेदार, तीन अलग-अलग राजनीतिक वज़न, और तीनों अपने-अपने तरीके से समर्थन बटोरने में जुटे। लेकिन इसी हलचल के बीच एक ऐसा नाम था, जो न भीड़ खींच रहा था, न शक्ति प्रदर्शन कर रहा था… वह था सुखचंद बेसरा—48 वर्षीय यह संगठनात्मक कार्यकर्ता पिछले 25 सालों से कांग्रेस की गलियों में चुपचाप अपना इतिहास लिख रहा था।

छात्र जीवन से शुरू हुई यात्रा

Secret Story of Sukhchand Besra Gariyaband Congress District President: देवभोग ब्लॉक के छोटे से गांव दरलीपारा में 7 फ़रवरी 1977 को एक साधारण एस.सी. परिवार में जन्मे सुखचंद बेसरा ने 1993 में छात्र जीवन में ही कांग्रेस की सक्रिय सदस्यता ग्रहण कर ली थी। शुरुआत दरी बिछाने से हुई—फिर झंडा उठाया, फिर भीड़ का हिस्सा बने—और यही सिलसिला सालों चलता रहा।

Secret Story of Sukhchand Besra Gariyaband Congress District President: पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच वे कम बोलने वाले, पर भरोसेमंद कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाने लगे। 2001 में अविभाजित छत्तीसगढ़ में संगठन गठन की प्रक्रिया के दौरान उन्हें देवभोग ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया—यह उनकी जमीन से जुड़ी कार्यशैली की पहली आधिकारिक पहचान थी।

युवा कांग्रेस से लेकर संसद प्रतिनिधि तक

Secret Story of Sukhchand Besra Gariyaband Congress District President: संगठन धीरे-धीरे उन्हें आगे बढ़ाता गया। ये पद भले बड़े न दिखते हों, लेकिन सुखचंद की ताक़त भीड़ या दिखावे में नहीं, बल्कि निरंतरता और सहज पहुंच में थी।

  • 2006 – रायपुर ग्रामीण जिला युवा कांग्रेस के महामंत्री
  • 2007–2009 – जोगी खेमे की निकटता के कारण संसद प्रतिनिधि
  • 2008 – पुनः ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के महामंत्री

कांग्रेस सत्ता से दूर, संगठन बिखरता रहा—पर सुखचंद डटे रहे

2015 से 2021 तक वे फिर ब्लॉक अध्यक्ष बने। यह वह समय था जब कांग्रेस लगातार सत्ता से बाहर थी, कार्यकर्ता छिटक रहे थे, और संगठन में निराशा गहराती जा रही थी। लेकिन सुखचंद बेसरा ने ब्लॉक स्तर पर जमीनी कैडर को जोड़े रखने का काम किया—यही गुण आगे चलकर उनके चयन की सबसे बड़ी वजह बना।

Secret Story of Sukhchand Besra Gariyaband Congress District President: 2021 में उन्हें जिला कांग्रेस कमेटी का उपाध्यक्ष बनाया गया। संगठन उन्हें आज़माता रहा और वे हर बार बिना शोर-शराबे के अपना काम करते रहे।

सिर्फ संगठन नहीं, जनता भी चुनती रही

Secret Story of Sukhchand Besra Gariyaband Congress District President: सुखचंद सिर्फ पार्टी के भीतर ही नहीं, बल्कि जनता के बीच भी उतने ही स्वीकार्य रहे। अपने गाँव में 3 बार सरपंच निर्वाचित हुए। देवभोग जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष भी बने। उनका यह जनाधार शांत था, पर मज़बूत था।


रायसुमारी की रात: भीड़ ने नाम नहीं लिया, पर कार्यकर्ताओं ने छोड़ा नहीं

गरियाबंद जिले में जिला अध्यक्ष के लिए तीन बड़े नाम चर्चा में थे—

  1. अमितेश शुक्ल के सुपुत्र — परिवार का प्रभाव, राजनीतिक परंपरा
  2. क्षेत्रीय विधायक की पहली पसंद — दिग्गज नेता युगल पांडेय
  3. तीसरा और सबसे शांत नाम — सुखचंद बेसरा

रायसुमारी के दिन बड़े नेताओं ने भीड़ जुटा ली—नारे, बैनर, शक्ति प्रदर्शन… सब कुछ तय रणनीति के तहत हुआ। दूसरी तरफ सुखचंद बेसरा किसी भी प्रकार का प्रदर्शन करने से बचते रहे। भूपेश बघेल के करीबी होने के बावजूद उन्होंने इस प्रभाव का उपयोग नहीं किया।

Secret Story of Sukhchand Besra Gariyaband Congress District President: जब नाम लिखने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो भीड़ की आवाज़ में उनका नाम कहीं नहीं था—लेकिन अंदर बैठे एक-एक वास्तविक कार्यकर्ता की चॉइस में उनका नाम लगातार तीसरे नंबर तक ज़रूर दर्ज था। प्रवेक्षक समझ गया—भीड़ शोर कर सकती है, पर संगठन की धड़कन शोर नहीं करती। यही वह क्षण था जब फ़ैसला पलटा।


आखिर क्यों चुने गए सुखचंद? — संदेश साफ, संगठन ज़मीन देखता है, रुतबा नहीं

कांग्रेस ने जब सूची जारी की और सुखचंद बेसरा का नाम जिला अध्यक्ष के रूप में सामने आया, तो गरियाबंद की राजनीति में हैरानी और सुकून दोनों थे। संगठन ने इस चयन के जरिए एक मजबूत राजनीतिक संदेश दिया—

Secret Story of Sukhchand Besra Gariyaband Congress District President: पद प्रदर्शन से नहीं, भीड़ से नहीं, रिश्तों से नहीं,बल्कि संगठन के प्रति ईमानदारी और निरंतरता से मिलते हैं। सुखचंद की प्रोफ़ाइल चमकदार नहीं थी, लेकिन उसमें समर्पण था—और यही वह असली पूँजी थी जिसे कांग्रेस ने पहचाना।


आखिर में यही ‘सीक्रेट’ था — शांत चेहरे के भीतर छुपी 25 साल की निष्ठा

Secret Story of Sukhchand Besra Gariyaband Congress District President: सुखचंद बेसरा का जिला अध्यक्ष बनना किसी राजनीतिक चमत्कार का परिणाम नहीं था। यह 25 साल से की गई लगातार सेवा, जमीन से जुड़ाव, और बिना किसी शोर के किए गए संगठनात्मक कार्यों का नतीजा था।

गरियाबंद ने पहली बार महसूस किया कि भीड़ से नेता नहीं तय होते—कार्यकर्ता से होते हैं। और इस बार, कार्यकर्ताओं ने अपनी चॉइस को शांत लेकिन स्पष्ट रखा—सुखचंद बेसरा। न वर्तमान विधायक जनक ध्रुव का समर्थन काम आया न, पूर्व विधायक अमितेश की पसंद काम आई। संगठन से जुड़े जमीनी कार्यकर्ता पर मुहर लगी।

अब पढ़िए किसे बनाया गया कहां का जिला अध्यक्ष ?

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने छत्तीसगढ़ में 41 जिलाध्यक्षों की लिस्ट जारी कर दी है। रायपुर सिटी से श्रीकुमार शंकर मेनन, रायपुर ग्रामीण से राजेंद्र पप्पू बंजारे, बिलासपुर शहर से सिद्धांशु मिश्रा और बिलासपुर ग्रामीण से महेंद्र गंगोत्री को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सुकमा में पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बेटे हरीश लखमा को कमान सौंपी गई है।

कुल 41 जिलाध्यक्षों में 5 महिलाओं को जगह मिली है। इनमें सुमित्रा धृतलहरे (बलौदाबाजार), तारिणी चंद्राकर (धमतरी), गजमती भानु (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही), रश्मि गभेल (सक्ती) और शशि सिंह (सूरजपुर) शामिल हैं। महिलाओं की यह हिस्सेदारी कुल जिलाध्यक्षों की लगभग 12.2% है।

महासमुंद में द्वारिकाधीश यादव, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में अशोक श्रीवास्तव और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में सुरजीत सिंह ठाकुर को अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं रायगढ़ शहर में शाखा यादव और रायगढ़ ग्रामीण में नागेंद्र नेगी को कमान दी गई है।

बालोद में चंद्रेश कुमार हिरवानी, बलरामपुर में हरिहर प्रसाद यादव और बस्तर ग्रामीण के लिए प्रेम शंकर शुक्ला को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। दंतेवाड़ा में सलीम राजा उस्मान, दुर्ग शहर में धीरज बाकलीवाल, कोंडागांव में रवि घोष और कोरबा शहर में मुकेश कुमार राठौर को जिम्मेदारी मिली है।

देखिए लिस्ट-

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के 41 नए जिलाध्यक्ष

जिले का नामनए जिलाध्यक्षों का नाम
बालोदचंद्रेश कुमार हिरवानी
बलौदाबाजारसुमित्रा घृतलहरे
बलरामपुरएडवोकेट हरिहर प्रसाद यादव
बस्तर ग्रामीणप्रेम शंकर शुक्ला
बेमेतराआशीष छाबड़ा
भिलाई शहरमुकेश चंद्राकर
बिजापुरलालू राठौर
बिलाईगढ़–सरायगढ़तारा चंद देवांगन
बिलासपुर शहरसिद्धांशु मिश्रा
बिलासपुर ग्रामीणमहेंद्र गंगोत्री
दंतेवाड़ासलीम राजा उस्मान
धमतरीतारिणी चंद्राकर
दुर्ग शहरधीरज बाकलीवाल
दुर्ग ग्रामीणराकेश ठाकुर
गरियाबंदसुखचंद बेसरा
गौरेला–पेंड्रा–मरवाहीगजमती भानु
जगदलपुर शहरसुशील कुमार मौर्य
जांजगीर–चांपाराजेश अग्रवाल
जशपुरयू. डी. मिंज
कांकेरबसंत यादव
कवर्धानवीन जायसवाल
खैरागढ़–छुईखदान–गंडईकोमल दास साहू
कोंडागांवरवि घोष
कोरबा शहरमुकेश कुमार राठौर
कोरबा ग्रामीणमनोज चौहान
कोरियाप्रदीप कुमार गुप्ता
महासमुंदद्वारिकाधीश यादव
मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुरअशोक श्रीवास्तव
मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकीसुरजीत सिंह ठाकुर
मुंगेलीघनश्याम प्रसाद वर्मा
नारायणपुरराजेश कुमार दीवान
रायगढ़ शहरशाखा यादव
रायगढ़ ग्रामीणनागेंद्र नेगी
रायपुर शहरश्रीकुमार शंकर मेनन
रायपुर ग्रामीणराजेंद्र पप्पू बंजारे
राजनांदगांव शहरजितेंद्र उदय मुदलियार
राजनांदगांव ग्रामीणविपिन यादव
सक्तीरश्मि गबेल
सुकमाहरीश लखमा
सूरजपुरशशि सिंह कोर्राम

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